Saturday, 3 March 2012

~ ~ ~ ~ ~ ~ ~ माँ का प्यार अतुलनीय ~ ~ ~ ~ ~ ~ ~


गलती करने पर,
छिप जाया करती थी माँ के आँचल में,
हर रोज देखती थी में सपनों में माँ को, 
माँ का प्यार एक ऐसा पवित्र प्यार है,
जो किसी और प्यार में पवित्रता नहीं है,
जैसे पिता,दोस्त,आदी का प्यार, 
माँ के प्यार में कोई छल कपट भी नज़र नहीं आता,  
गलती हो जाने पर भी,
माँ मुझको प्यार करते रहती थी,
सभी बच्चे माँ के दुलारे होते है, 
दुनिया में माँ का प्यार अतुलनीय है, 
माँ के प्यार के आगे भगवान् स्वयं भी झुक जाते है ।

~ ~ सदा बहार ~ ~ 

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